Saturday, August 4, 2012

147.तिमी छैनौ साथ मेरो बाँचौ कस्को लागी।


तिमी छैनौ साथ मेरो बाँचौ कस्को लागी।
देखावटी हाँसो कति हाँसौ कस्को लागी।

रङ्गमञ्च उठिसक्यो जीन्दगीको यहाँ,
कठपूतली जस्तै बनी नाचौ कस्को लागी।

मुटू भरि माया दिए आखिर छाडी गयौ,
गूलाबको फूल अब भाँचौ कस्को लागी।

पराईको भयौ आज हाँसो खुसी लुटी,
सपनाको त्यान्द्रहरु गाँसौ कस्को लागी।

हिरा मोति नभए नी दिन्थे चोखो माया,
चोखो प्रित लर्के बैँस साँचौ कस्को लागी।

तिमी छैनौ साथ मेरो.........!

पवन घर्ती मगर
हाडहाडे गुल्मी

No comments :

Post a Comment