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गन्तब्य रोकिदा शहर दोषी भो
चर्काई हत्केला पसिना नसुकी
भिखारी तोकिदा चहर दोषी भो
सुनौला सपना समाप्त नभई
बिहानी पोखिदा प्रहर दोषी भो
समुन्द्री छालले किनारा नभेटी
चाहत कोकिदा रहर दोषी भो
खडेरी थिएन जमिन नसुकी
बादल झोकिदा नहर दोषी भो
सुनौला सपना समाप्त नभई
बिहानी पोखिदा प्रहर दोषी भो
समुन्द्री छालले किनारा नभेटी
चाहत कोकिदा रहर दोषी भो
खडेरी थिएन जमिन नसुकी
बादल झोकिदा नहर दोषी भो
~[****गरुवाली तारा****]~
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